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Shiksha Rozgaar Abhiyan

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शिक्षा रोज़गार अभियान

नई पीढ़ी की शिक्षा और रोजगार के लिए स्वराज अभियान की पहल

हमें आज़ादी के आन्दोलन से औपनिवेशिक, भेदभावपूर्ण शिक्षा की जगह एक नया आदर्श मिला था – सबको शिक्षा, सामान शिक्षा, सार्थक शिक्षाI लेकिन पिछले 68 साल में इस सपने को झुठला दिया गयाI सबके लिये सहज-सुलभ, सामान और सार्थक शिक्षा की व्यवस्था शिक्षा रोज़गार आन्दोलन को प्रासंगिक बनता हैI

  • Lead Person

    Dileep Kumar

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    +91-8527071875

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    shikshaswaraj@ swarajabhiyan.org

प्रशस्ति

हमारी शिक्षा व्यवस्था और रोज़गार दशा देश के स्वराज के अधूरेपन का सबसे चिंताजनक पहलू हैI किसी भी देश का भविष्य उसकी नयी पीढ़ी की क्षमता पर निर्भर करता हैI नयी पीढ़ी की प्रतिभा को चमकाने में शिक्षा का सबसे बड़ा योगदान होता हैI यदि शिक्षा में भ्रष्टाचार, व्यवसायीकरण और मुनाफाखोरी की अनदेखी की जाए तो देश के विद्यार्थियों का भविष्य अन्धकारमय हो जायेगाI आज भारत की शिक्षा व्यवस्था की सरकारी भ्रष्टाचार और पूंजीपतियों द्वारा मुनाफाखोरी के कारण अत्यन्त खतरनाक दशा हैI नयी शिक्षानीति के आड़ में शिक्षा का बजट 6% प्रतिशत करने की जरुरत को पूरा करने की कोई सुनवाई नहीं हैI उलटे फीस बढ़ने और छात्रवृत्ति घटने का ख़तरा हैI अब साम्प्रदायिकता और कट्टरपंथी मानसिकता को भी बढ़ावा देने की कोशिशें की जा रही हैंI इस खतरनाक दशा के बारे में देश का अध्यापक मुखर हैI अखिल भारतीय शिक्षक संगठनों की और से सुझावों को प्रस्तुत किया गया हैI देश की शिक्षा में सुधार से जुड़े जन-संगठनों की भी भूमिका सराहनीय हैI

दूसरी तरफ ‘रोजगारविहीन अर्थनीति’ का नयी सरकार के पास तीन बरस बीतने पर भी कोई निदान सामने नहीं हैI अर्थव्यवस्था यदि 7% से अधिक प्रगति कर रही है तो रोज्गार्निर्मान में 2% की भी रफ़्तार क्यों नहीं है? प्रगति के परिणाम नयी पीढ़ी को क्यों नहीं मिल रहा है? रोजगार के प्रश्न को सामाजिक न्याय के लिए बनाई गयी आरक्षण व्यवस्था से जोड़कर बेरोजगारी का दोष आरक्षण पर मढने की कोशिश को बढ़ावा दिया जा रहा हैI इससे गुजरात से लेकर हरयाणा और आँध्रप्रदेश तक में विद्यार्थियों में फूट डाली गयी हैI सडकों पर अराजकता हो रही हैI अधीकंश राज्य सरकारें और राजनीतिक दल संविधान सम्मत समाधान की बजाय आग में घी डालने का काम कर रहे है, वोट बैंक की वासना में नयी पीढी के घाव पर नमक छिड़का जा रहा हैI

अर्धशिक्षित और अर्ध-रोजगारी भारतीय नयी पीढी का निर्माण देश के लिए कलंक की -बात हैI युवजनों के साथ अन्याय और संविधान के साथ धोखा हैI इसीलिए स्वराज अभियान ने देश की राजधानी में एक राष्ट्रिय सम्मलेन के जरिये विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को एक मंच पर 8-9 नवम्बर, 2016 को एकत्रित करके 6 सूत्रीय समाधान पत्र प्रस्तुत किया हैI यह संकल्प भाग में प्रकाशित हैI दूसरे, शिक्षा रोज़गार अभियान के नाम से एक शिक्षा – रोजगार संबंधी पहल के लिए राष्ट्रीय मंच की शुरुआत की हैI इसकी प्रादेशिक और स्थानीय शाखाओं की भी स्थापना का काम शुरू हैI आपका इसमें योगदान इस काम को आगे बढ़ाएगा और नयी पीढी के साथ हो रहे अन्याय को दूर करने में योगदान करेगाI

तीसरे, इसी बीच देश के मुख्य विद्याकेंद्रों में – हैदराबाद और चेन्नई से लेकर दिल्ली, बनारस और इलाहाबाद तक विद्यार्थी आंदोलनों के विस्फोट से सारा समाज नयी पीढी की पीड़ा से अवगत हुआ हैI नयी सरकार द्वारा इसके दमन की कोशिशों का बुद्धिजीवियों और शिक्षकों ने प्रतिरोध किया हैI हम जानते हैं कि नयी पीढी की शिकायतें वाजिब हैंI इसलिए हमें विद्यार्थी दमन के विरोध में खड़े होकर विद्यर्थियों के साथ न्यायपूर्ण संवाद की मांग को समर्थन दिया हैI चौथे, यह सच है कि शिक्षा सुधार का सवाल 1966 में कोठारी समिति की दूरदर्शी सिफारिशों के बावजूद और विद्यार्थी विद्रोह से केंद्र सरकार के हटाने के बाद भी 1977 से टला जा रहा हैI अब केन्द्रीय सरकार ने श्री टी.एस.आर. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में बनी समिति की रपट जारी करके शिक्षा में सुधार के बारे में अपनी दृष्टि सामने रखी हैI इससे देश को चर्चा और हस्तक्षेप का मौका मिला हैI शिक्षा रोज़गार अभियान की कोशिश है कि 1) सुब्रह्मण्यम समिति की सिफारिश, 2) शिक्षा विशेषज्ञों के सुझावों, तथा 3) विद्यार्थी संगठनों और छात्रसंघों के प्रतिनिधियों के सुझावों को एकसाथ राष्ट्रीय संवाद का प्रसंग बनाया जायेI कालेज और विश्वविद्यालय स्तर पर ‘शिक्षा-रोज़गार संवाद’ और प्रदेश तथा केंद्रीय स्तर पर ‘शिक्षा-रोजगार जनसंसद’ का आयोजन के लिए सरोकारी नागरिकों, विशेषकर शिक्षकों और शिक्षार्थियों को सक्रिय किया जायेI पांचवें, इस प्रसंग में देश के मुख्य प्रदेशों में संपर्क सूत्र के रूप में सम्मानित नागरिक आगे आ गए हैI उत्तराखंड में तो पुरे प्रदेश में शिक्षा स्वराज यात्रा संपन्न हो चुकी हैI उत्तर प्रदेश शिक्षा स्वराज की और से एक दृष्टि पत्र प्रसारित किया गया हैI तमिलनाडु के शिक्षा शास्त्री भी एक संवाद कर चुके हैंI बिहार में शिक्षा संवाद के लिए बैठक हुई हैI दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थियों ने अपने राष्ट्रीय शिविरों में शिक्षा स्वराज के 6 सूत्रीय समाधान पत्र पर चर्चा की हैI

आइये! देश की बेचैन नयी पीढी की पुकार सुनेंI छात्र-छात्राओं के सपनों की रक्षा करेI राष्ट्र-निर्माण को आगे बढ़ने और स्वराज का अधूरापन ख़तम करनेवाली शिक्षा-व्यवस्था और रोजगार नीति के लिए देश को सक्रिय और प्रभावशाली बनायेI शिक्षा-व्यवस्था और रोजगार नीति के लिए देश को सक्रिय और प्रभावशाली बनायेI

हमारे सिद्धांत

1. शिक्षा की उच्च गुणवत्ता और समान पहुँच के लिए राजकीय प्रावधान।

2. स्कूली शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी।

3. संदर्भ के उपयुक्त प्रासंगिक पाठ्यक्रम और शिक्षार्थी केंद्रित शिक्षाशास्त्र।

4. काम और पढ़ाई का मेल।

हमारी नीति

1. शिक्षा का बजट बढ़ाकर कम से कम सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का छह फीसदी किया जाए। अमीर या गरीब, हर बच्चे के समग्र विकास के लिए उच्च गुणवत्ता की शिक्षा तक उसकी पहुंच सुनिश्चित की जाए। शिक्षा की उच्च गुणवत्ता और समान पहुँच के लिए राजकीय प्रावधान हो।

2. सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करने के लिए शिक्षकों और प्रशासकों की भर्ती और क्षमता निर्माण हो। इसके लिए शिक्षण-प्रशिक्षण की खातिर न्यायमूर्ति वर्मा आयोग की सिफारिशों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए। स्पष्ट मानदंडों के आधार पर शिक्षक भर्ती, पेशेवर विकास और कैरियर में उन्नति के लिए एक पारदर्शी प्रणाली को अपनाया जाए। स्कूल प्रशासन को पेशेवर बनाया जाए और योग्यता के आधार पर चयन को प्रोत्साहित किया जाए।

3. लड़कियों, पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों, गरीब परिवारों और सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के छात्रों के लिए विशेष प्रावधान हो जिससे कुल नामांकन, स्कूल छोड़ने वालों की समस्या का समाधान, उच्च गुणवत्ता की शिक्षा, उच्च शिक्षा की सुविधा और स्कूलों के भीतर गैर भेदभाव-शून्यता सुनिश्चित की जा सके। बेहतर पहुँच और उच्च नामांकन के लिए छात्रावास और परिवहन की सुविधा हो।

4. संदर्भ केंद्रित पाठ्यक्रम के निर्माण और विद्यालय के प्रबंधन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी हो। विद्यालय और शिक्षकों की जवाबदेही ग्राम सभा या मोहल्ला सभा जैसे एक स्थानीय निकाय को प्राप्त हो।

5. कक्षा पाँच तक की शिक्षा काफी हद तक स्थानीय संदर्भ और संसाधनों पर आधरित हो और बच्चे की मातृभाषा में दी जाए। ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए कि अकादमिक संसाधन ज्ञान-कोष और रोजगार के अवसर अंग्रेजी के पक्ष में सिमटे न हों।

6. ध्यान केवल सूचनाओं पर नहीं बल्कि सीखने और सिखाने के हासिल पर हो। पढ़ाई-लिखाई के आकलन को सभी राज्यों में प्रामाणिक बनाया जाए।

7. सरकार यह सुनिश्चित करे कि शिक्षण और शिक्षा की विषय सामग्री संविधान में निहित सिद्धांतों के अनुरूप हो।

8. सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सार्वजनिक नीति बने। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, यह सुनिश्चित किया जाए कि उनकी सुविधायें और बुनियादी ढांचे सेंट्रल स्कूल/नवोदय विद्यालय के बराबर हों। ग्रामीण सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। पीने का पानी, स्वच्छता और योग्य शिक्षकों की भर्ती जैसी बुनियादी सुविधाओं के प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं।

9. व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के विस्तार और विभिन्न शैक्षिक धाराओं की स्थिति में समानता लाकर उच्च बेरोजगारी दर को नियन्त्रित किया जाए। इसके अलावा, व्यावसायिक शिक्षा को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए और व्यावसायिक डिग्रियों का तेजी से विकास किया जाए।

10. उच्च शिक्षा को एक ऐसी नयी दिशा देने की जरूरत है जो देश के संदर्भ में, देश की जरूरत और हमें विरासत में मिले ज्ञान के अनुकूल हो; न कि पश्चिम से प्राप्त ज्ञान की नासमझ नकल।

11. सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित उच्च शिक्षा, विशेष रूप से राज्यों के विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सरकारी आवंटन बढ़ाया जाए। मूल भुगतान करने की क्षमता वाले सिद्धांत पर आधारित छात्रवृत्ति-सह ऋण और फेलोशिप के माध्यम से आर्थिक रूप से वंचित छात्रों के नामांकन और उपस्थिति में सुधार हो। निजी संस्थाओं की फीस और शिक्षा की गुणवत्ता का प्रभावी विनियमन (रेगुलेशन) हो।